Trimbakeshwar

त्र्यंबकेश्वरके बारे में

त्र्यंबकेश्वर यह त्रिंबक शहर में एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, यह भारत मे महाराष्ट्र राज्‍य के नासिक शहर से 28 किमी दुर है| यह मंदीर भगवान शिव को समर्पित है और शिवजी के बारह ज्‍योर्तीलींग मे से एक है| यह स्‍थल गोदावरी नदी के उद्गम स्‍थान से भी जाना जाता है जो प्रायद्वीपीय भारत में सबसे लंबी नदी है। गोदावरी नदी को हिंदू धर्म मे पवित्र माना जाता है। जो ब्रम्‍हगीरी पहाड़ों से निकलके राजमहेंद्रु के पास समुद्र मिलती है। तिर्थराज कुशावर्त को नदी गोदावरी का प्रतीकात्मक मूल माना जाता है और एक पवित्र स्नान जगह के रूप में हिंदुओं द्वारा प्रतिष्ठित है।

मंदिर दर्शन के लिए सुबह 5:30 से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है

यह गोदावरी नदी के स्रोत पर स्थित है, जो प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है। गोदावरी नदी, जिसे हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है, ब्रम्हागिरी पहाड़ों से निकलती है और राजमुद्री के पास समुद्र से मिलती है। कुशावर्त, एक कुंड को गोदावरी नदी का प्रतीकात्मक उद्गम माना जाता है, और हिंदुओं द्वारा एक पवित्र स्नान स्थान के रूप में पूजनीय है।

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त्र्यंबकेश्वरमें की जानेवाली पूजा-विधी

|| नारायण नागबलि||

नारायण नागबलि ये दोनो विधी मानव की अपूर्ण इच्छा , कामना पूर्ण करने के उद्देश से किय जाते है इसीलिए ये दोने विधी काम्यू कहलाते है। नारायणबलि और नागबपलि ये अलग-अलग विधीयां है। नारायण बलि का उद्देश मुखत: पितृदोष निवारण करना है । और नागबलि का उद्देश सर्प/साप/नाग हत्याह का दोष निवारण करना है। केवल नारायण बलि यां नागबलि कर नहीं सकतें, इसगलिए ये दोनो विधीयां एकसाथ ही करनी पडती हैं।

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|| कालसर्प ||

इस ससार में जब कोई भी प्राणी जिस पल मे जन्म लेता है, वह पल(समय) उस प्राणी के सारे जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्वपुर्ण माना जाता है। क्यों की उसी एक पल को आधार बनाकर ज्योतिष शास्त्र की सहायता सें उसके समग्र जीवन का एक ऐसा लेखा जोखा तैयार किया जा सकता है, जिससे उसके जीवन में समय समय पर घटने वाली शुभ अशुभ घटनाऔं के विषायमें समय से पूर्व जाना जा सकता है।

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|| त्रिपिंडी श्राध्‍द ||

पितरों की प्रसन्नता के लिये धर्म के नियमानुसार हविष्ययुक्त पिंड प्रदान आदि कर्म करना ही श्राध्द कहलाता है। श्राध्द करने से पितरों कों संतुष्टि मिलती है और वे सदा प्रसन्न रहते हैं और वे श्राध्दककर्ता को दीर्घायू प्रसिध्दी, तेज स्त्री पशु एवं निरागता प्रदान करते है।

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||महामृत्युंजय मंत्र जाप||

महामृत्युंजय मंत्र के वर्णो (अक्षरों) का अर्थ महामृत्युंघजय मंत्र के वर्ण पद वाक्यक चरण आधी ऋचा और सम्पुतर्ण ऋचा-इन छ: अंगों के अलग अलग अभिप्राय हैं।ओम त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर हैं जो महर्षि वशिष्ठर के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं। उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं। इन तैंतीस देवताओं की सम्पुर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है जिससे महा महामृत्युंजय का पाठ करने वाला प्राणी दीर्घायु तो प्राप्त करता ही हैं । साथ ही वह नीरोग, ऐश्व‍र्य युक्ता धनवान भी होता है ।

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|| रुद्राभिषेक||

अभिषेक का अर्थ होता है स्नान करना या कराना। रुद्र अभिषेक जहां पंचामृत पूजा मंत्रोच्‍चारण के साथ त्र्यंबकेश्‍वर भगवान को अर्पण किया जाता है इससे उस व्यक्ति की सभी मनोकामना पुर्ण होती है। यह रुद्रा अभिषेक से समृद्धि, सभी इच्छाओं को पूरा होणे कि ताकद तथा नकारात्मक छटा का नाश और जीवन में सभी ओर खुशी मिलती है।

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पुरोहित संघ की ओर से अधिकृत ब्राह्मण
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कालसर्प योग 2022

कालसर्प योग २०२२ Jul: 2 , 3 , 4 , 7 , 9 , 10 , 13 , 16 , 17 , 18 , 21 , 23 , 24 , 25 , 28 , 30 , 31 Aug: 1 , 2 , 5 , 7 , 8 , 9 , 11 , 13 , 14 , 15 , 16 , 19 , 21 , 22 , 24 , 27 , 28 , 30 Sep: 1 , 3 , 4 , 7 , 10 , 11 , 15 , 17 , 18 , 19 , 21 , 24 , 25 , 30 Oct: 2 , 3 , 5 , 8 , 9 , 10 , 12 , 14 , 16 , 17 , 20 , 22 , 23 , 24 , 25 , 29 , 30 , 31
नारायण नागबली २०२२ Jul: 1 , 4 , 8 , 11 , 15 , 21 , 24 , 28 , 31 Aug: 4 , 7 , 11 , 16 , 20 , 25 , 28 Sep: 3 , 8 , 12 , 15 , 18 , 21 , 24 , 30 Oct: 5 , 11 , 14 , 18 , 21 , 26 , 29
त्रिपिंडी २०२२ Jul: 3 , 6, 10 , 13 , 17 , 23 , 26 , 28 , 30 Aug: 6 , 9 , 13 , 18 , 22 , 27 , 30 Sep: 5 , 10 , 11 , 12 , 15 , 18 , 20 , 23 , 25 Oct: 7 , 13 , 16 , 20 , 23 , 25 , 28
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